National Festival of India in Hindi

भारत त्योहारों की भूमि है। हर किसी देश में राष्ट्रीय त्योहारों को शुभ दिन माना जाता है। भारत में कई प्रमुख त्योहार और राष्ट्रीय पर्व मनाए जाते हैं। भारत में लोग त्योहारों को एकता और भाईचारे के साथ मनाते हैं। देश में मनाए जाने वाले तीन राष्ट्रीय पर्व हैं।
(i)- महात्मा गांधी जयंती। 
(ii)- स्वतंत्रता दिवस। 
(iii)- गणतंत्र दिवस।

(i)- महात्मा गांधी जयंती ( 2 अक्टूबर ) 


भारत में कुछ व्यक्ति ऐसे हुए हैं, जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता है। और किसी अन्य व्यक्ति के साथ इनका तुलना कभी नहीं की जा सकती है। उनमे से एक थे। महात्मा गांधी जिन्हें हम राष्ट्र के पिता भी कहते हैं, वहां एक महापुरुष थे। जिन्होंने हमारे देश  सच्चाई और इन सब के अपने तरीके से ब्रिटिश शासन से मुक्त करवाया। भारत में हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उनके जन्मदिन पर 2 अक्टूबर को हर साल गांधी जयंती के रूप  मनाया जाता है। मोहनदास करमचंद गांधी महात्मा गांधी का मूल नाम था, गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में एक हिंदू परिवार में हुआ था। गांधी जी के पिता का नाम करमचंद गांधी था। जोकि, राजनीतिक व्यक्ति भी थे। गांधी जी की माता का पुतलीबाई था। वह एक  धार्मिक महिला थी।

 

गांधी जी की कहानी

2 October 1869 ईस्वी में जब गुजरात के पोरबंदर शहर में महात्मा गांधी जी का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गांधी और मां का नाम पुतलीबाई था। आरती गांधीजी पोरबंदर शहर में पड़े हुए थे। लेकिन, जन्म के कुछ समय बाद ही उनका पूरा परिवार राजकोट में रहने लगा। और फिर गांधीजी की शुरुआत पढ़ाई भी वहीं से हुई थी। और 9 साल की उम्र में पहली बार स्कूल जाने वाले गांधीजी शुरू से ही काफी शर्मीले थे। और वह बचपन से ही किताबों को अपना दोस्त मानते थे। और फिर आगे चलकर 13 साल उम्र में उनकी शादी एक 1 साल बड़ी लड़की कस्तूरबा से हो गई। उस समय शादियां काफी कम उम्र में ही हो जाया करती थी। जब गांधी जी 15 साल के थे। तब गांधी जी के पिता का  निधन हो गया, और पिता का निधन के 1 साल बाद भी गांधीजी की पहली संतान भी हुई। लेकिन, दुर्भाग्य से जन्मदिन के कुछ समय बाद ही बच्चे की मृत्यु हो गई। और इस तरह से गांधी जी के ऊपर मानव दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। लेकिन, कठिन परिश्रम में भी गांधीजी ने खुद को संभाला और फिर 1887 ईस्वी में अहमदाबाद से हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की। और फिर आगे चलकर कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद से मोदी दुबे जोशी की सलाह पर गांधीजी ने लंदन जाकर गांव के लॉ की पढ़ाई की। 1888 ईस्वी में गांधीजी दूसरी बार पिता बने, और इसी वजह से उनकी मां नहीं चाहती थी। कि, वह अपने परिवार को छोड़कर कहीं दूर जाएं। लेकिन, किसी भी कैसे भी करके उन्होंने अपनी मां को मनाया। और फिर 4 सितंबर 1888 ईस्वी को गांधीजी लंदन पढ़ाई तो चले गए, फिर 1891 ईस्वी में पढ़ाई पूरी करके अपने वतन भारत वापस आ गए। हालांकि, विदेश में पढ़ाई करने के बावजूद भी भारत आने पर नौकरी के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ी। और फिर 1893 ईस्वी में दादा अब्दुल्ला एंड कंपनी नाम के एक भारतीय कंपनी में नौकरी मिली। और इस नौकरी के लिए गांधीजी को साउथ अफ्रीका जाना पड़ा था। और साउथ अफ्रीका बिताए गए, साल गांधी जी के जीवन में सबसे कठिन समय में से एक थे। क्योंकि, वहां पर उन्हें भेदभाव का  काफी सामना करना पड़ा। इन्हीं भेदभाव ने ही उन्हें इतना सक्षम बना दिया। कि, वहां लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार रहते थे। गांधीजी को केवल 1 साल के लिए ही भेजा गया था। और वहां पर रहे भारतीयों और आम आदमी के लोगों के लिए आपके लिए अगले 20 साल तक लड़ते रहे, और इसी दौरान उन्होंने नेशनल इंडिया कांग्रेस की स्थापना की थी। और अफ्रीका में लड़ते हुए गांधी जी ने एक लैंडर सिविल राइट एक्ट बीच में  खुद की पहचान बना ली थी। गोपाल कृष्ण गोखले जो कि, एक इंडियन नेशनल कांग्रेस के एक सीनियर लेंजर थे। उन्होंने गांधीजी से भारत वापस आकर अपने देश को आजाद करवाने के लिए लोगों की मदद करने की बात की और फिर इस तरह से 1915 में गांधी जी भारत वापस आए आ गए, और फिर नहीं आकर उन्होंने नेशनल कांग्रेस ज्वाइन करके भारत की आजादी में अपना सहयोग शुरू कर दिया। और भारत के अंदर कुछ सैलून में ही वहां लोगों के चाहिता बन गए। और फिर अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए उन्होंने भारत के लोगों में एकता की की गांठ बांध यहां तक कि, उन्होंने अलग-अलग धर्म और जाति के लोगों को भी एक साथ लाने का काम किया। और 1922 ईस्वी में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन चलाया। जिसके तहत अंग्रेजी चीजों का इस्तेमाल भारतीय लोगों ने लगभग बंद ही कर दिया था। और फिर जब यह आंदोलन काफी सफल साबित हो रहा था। तब महात्मा गांधी को 1922 ईस्वी में 2 सालों के लिए जेल भेज दिया गया। हालांकि, गांधी जी के जेल जाने पर लोगों के अंदर और भी गुस्सा आ गया। जिसकी वजह से पूरा भारत अब एक होने लगा था। और फिर इस चीज कड़ी में ही मार्च 1930 ईस्वी में दांडी यात्रा को भी अंजाम दिया गया। जिससे कि 6000 लोगों की गिरफ्तारी हुई, और फिर इसी तरह से ही आगे भी गांधीजी के मेट्रो में क्विट इंडिया मूवमेंट की तरह ही कई और भी आंदोलन को अंजाम दिया जाता रहा। इस दौरान गांधीजी की बहुत बार गिरफ्तारी हुई। लेकिन, महात्मा गांधी के द्वार लगाई गई, चिंगारी आप लोगों के भीतर आग बनकर बनकर देने लगी थी। और यही वजह थी। कि, गांधीजी के साथ-साथ बाकी क्रांतिकारियों ने मिलकर 1947 ईस्वी में देश को आजाद बढ़ाने में अहम रोल अदा किया। और फिर 15 अगस्त 1940 को हमारा भारत देश आजाद हो गया। उनकी देश के अंदर आजादी का जश्न चल रहा था। तभी 30 जनवरी 1948 ईस्वी को नाथूराम ने गांधी जी को गोली मार कर हत्या कर दी, और फिर इस  घटना ने ना सिर्फ देश में पूरी दुनिया में शोर फैला दिया। हालांकि, 15 नवंबर 1940 ईसवी को गांधीजी के हत्यारे नाथूराम को फांसी दे दी गई थी।

 

(ii)- स्वतंत्रता दिवस ( 15 अगस्त ) 


15 अगस्त का दिन भारतीय लोकतंत्र और हर भारतीय के लिए काफी खास दिन है। 15 अगस्त 1947 ईस्वी को भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली थी। तब से हमारे देश में हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्र दिवस मनाया जाता है। इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किला पर राष्ट्रीय ध्वज (झंडा) फहराते हैं। इस दिन सभी सरकारी कार्यालय जैसे बैंक, पोस्ट ऑफिस आदि अवकाश होता है। आज के समय में भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।

 

क्यों मनाया जाता है। स्वतंत्रता दिवस

15 अगस्त का दिन हम सब के लिए गर्व का दिन है। आज का दिन सभी भारतीयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। और इतिहास में सदा के लिए उल्लेख हो चुका है। आज के दिन लाल किला के प्राचीन से लेकर गांव के छोटे-छोटे मोहल्लों में भी स्वतंत्रता दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह सभी देशवासियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। क्योंकि, यह दिन हमें मौका देता है। उन महान स्वतंत्र सैनिकों को याद करने का जिन्होंने हमें एक शांतिपूर्ण जीवन देने के लिए प्राणों की आहुति दे दी। उनकी बलिदानों के लिए आज हम स्वतंत्र है। भारत की आजादी के पहले दिन को याद करने के लिए हम हर साल स्वतंत्रता दिवस बड़े धूमधाम से मनाते है। साथ ही हम उनके महान लोगों को याद करते हैं। जिनके कठिन परिश्रम की वजह से हम अपनी आजादी का उपभोग करने लायक बने हैं। और अपनी इच्छा और अपनी मर्जी से खुली हवा में सांस ले सकते हैं। अंग्रेजों से आजादी पाना हमारे पूर्वजों के लिए कठिन काम था। लेकिन हमारे पूर्वजों ने लगातार आजादी प्राप्त कर ली। हमें उनके कार्यों को कभी भूलना नहीं चाहिए। और हमेशा याद करते रहना चाहिए। केवल 1 दिन में हम सभी स्वतंत्र सैनिकों के कर्मों को हम याद नहीं कर सकते। लेकिन, दिल से सलामी दे सकते है। आज सभी भारतीयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। जिसे हम महान लोगों के कुर्बानी को याद करने के लिए मनाते हैं। जिन्होंने देश को आजाद करने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। भारत में आजादी मुमकिन हो सकी। क्योंकि, संयोग बलिदान सभी भारतीयों की भाग्यता थी। हमें महत्व सलामी देनी चाहिए। उन सभी भारतीय नागरिकों को क्योंकि, वह असली राष्ट्रीय हीरो है। भारत के कुल महान स्वतंत्रता में बाल गंगा तिलक, महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, आदि। यह सब देशभक्त थे। जिन्होंने, अपने जीवन के अंत तक भारत की आजादी के कड़क संघर्ष किया। हम लोग हमारे पूर्वजों के द्वारा किए गए। संघर्ष की कल्पना भी नहीं कर सकते। आजादी के इतने वर्षों के बाद भी आज हमारा देश विकास की सही राह पर है। आज हमारा देश पूरी दुनिया में लोकतंत्र के रूप में अच्छे से है।

 

(iii)- गणतंत्र दिवस ( 26 जनवरी ) 

26 जनवरी गणतंत्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय त्योहार राष्ट्रीय त्योहार पर्व है। इस दिन भारत गणतंत्र दिवस मनाता है जो कि, प्रतिवर्ष 26 जनवरी को आता है क्योंकि, इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। भारत देश के संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने ठीक 2 साल 11 महीने 18 दिनों में देश के विस्तृत संविधान को तैयार किया था, और इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था।

 

क्यों मनाया जाता है गणतंत्र दिवस

जैसा कि हम सब जानते है। कि हमारी मात्र भूमि कई वर्षों तक ब्रिटिश सरकार के अधीन थी। उस समय सरकार के अंग्रेजी हुकूमत ने भारतीय लोगों को जबरदस्ती अपने कानून का पालन करने को कहा, और ना मानने वालों के साथ अत्याचार भी किया। कई वर्षों के संघर्ष के बाद भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने कड़ी मेहनत और जीवन न्योछावर करने के बाद भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली। स्वतंत्रता के 2.5 साल बाद भारत सरकार ने स्वयं का संविधान लागू किया। और भारत को एक प्रजा तांत्रिक राज्य घोषित किया। लगभग 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत के संविधान को भारत के संविधान सभा में पास किया गया इस घोषणा के बाद से इस दिन प्रतिवर्ष भारतीय लोग गणतंत्र दिवस के रूप मनाने लगे गणतंत्र दिवस भारतीय लोगों के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण दिन है। गणतंत्र का अर्थ होता है जनता का द्वारा जनता के लिए शासन।

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1930 को रावी नदी के तट पर स्वतंत्रता सेनानियों ने पूर्ण स्वतंत्र के के घोषणा की थी। जब 13 अप्रैल 1919 की जालम वाले बाग की घटना हुई तो, इस घटना ने ही भगत सिंह, उधम सिंह जैसे क्रांतिकारियों को जन्म दिया क्योंकि, यह घटना बहुत ही दुखदाई घटना थी इसमें जनरल डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौजी ने बड़े बच्चों और महिलाओं सहित सभी लोगों को मार दिया था। इस घटना के बाद सभी का दिल आजादी आजादी की आग में जलने लगा था सब लोग भारत की आजादी के लिए बलिदान देने को तैयार थे 26 जनवरी के दिन ही 1930 में स्वतंत्रता सेनानियों ने यह प्रतिज्ञा ली थी। जब तक भारत पूरी तरह से स्वतंत्रता नहीं हो जाता है। यह आंदोलन इसी तरह चलते रहेगा। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ और 26 जनवरी 1950 को हमारा देश भारत लोकतंत्र गणराज्य घोषित किया गया।

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