Independence Day of India

मारा देश 15 अगस्त, 1947 को आजाद हुआ था और हर साल इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। वही 26 जनवरी, 1950 को भारत में सविधान लागू किया गया था। यह दिन ब्रिटिशों के पंजों से आजादी प्राप्त करने के लिए हमारे स्वतंत्रता सेना ने और भारत के लोगों के बहादुर होने का प्रतीक है। और यह दिन ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी को दर्शाता है। इसी दिन भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र बना इसलिए इस दिन को याद रखने के लिए प्रतिवर्ष हम 15 अगस्त को स्वतंत्र दिवस के रूप दिवस के रूप में मनाते हैं।

 

कैसे बना राष्ट्रगान

‘जन गण मन’ सबसे पहले 1905 में बांग्ला भाषा में लिखा गया था। जिसे रविंद्र नाथ टैगोर ने लिखा था वही रविंद्रनाथ टैगोर ने जिन्हें बाद में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। ‘जन गण मन’ की पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था। उस समय इसकी लोकप्रियता अधिक नहीं थी और बंगाल के बाहर बहुत कम लोग इसके बारे में जानते थे। तुम्हे बता दे कि रविंद्रनाथ टैगोर ने राष्ट्रगान को ना केवल लिखा इसे गाया भी। 1917 में उन्होंने राष्ट्रगान को संगीत के सात सुरों में बाँधा। जल्द ही ‘जन गण मन’ भारत के लोगों की आवाज बन गया। उसके बाद तो इसे एक भजन की तरह गाया जाने लगा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशनों की शुरुआत इसी के गायन से की जाने लगी आजादी के बाद तिरंगा भारत का राष्ट्रीय ध्वज बन गया, लेकिन राष्ट्रगान पर फैसला होने में 3 साल लग गए। ‘जन गण मन’ के हिंदी वर्जन को संविधान सभा ने भारत में राष्ट्रगान के रूप में 24 जनवरी 1950 को अपनाया।                इससे जुड़ी एक रोचक बात यह है।कि, ‘जन गण मन’ के अलावा ‘वंदे मातरम‘ को भी राष्ट्रीय गान बनाने की बात उठी थी, लेकिन उसे राष्ट्रगीत बनाया गया। जब भारत गणतंत्र बना तो संसद में तब के राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी। कि, ‘जन गण मन’ का पहला छंद भारत का राष्ट्रगान होगा। ‘जन गण मन’ का अर्थ व्यापक है। इसके कुछ अंशों का अर्थ है कि भारत के नागरिक खुद ही भारत के भाग्य विधाता है। रविंद्र नाथ टैगोर का भी मानना था कि भारत भाग्य विधाता के केवल दो अर्थ हो सकते हैं।                                                                  हला अर्थ है- देश की जनता और दूसरा ईश्वर। पूरे राष्ट्रगान में देश के अलग-अलग राज्यों और नदियों का जिक्र किया गया है और उसकी विशेषताओं के बारे में भी बताया गया है। कि राष्ट्रगान को गाने की अवधि 52 सेकंड तय की गई है। कुछ अवसरों पर इसे सक्षिप्त रूप में भी गाया जाता है। जिसमें लगभग 20 सेकंड का समय लगता है। आज जिस रूप में हम राष्ट्रगान सुनते है। उसकी धुन ऑल इंडिया रेडियो ने बनाई थी। ऑल इंडिया रेडियो ने सामूहिक स्वरगान और मिलिट्री बैंड के लिए अलग-अलग बनाई थी। राष्ट्रगान को सावधान मुद्रा में खड़े होकर गए जाने का नियम है। उस समय बातचीत करना या खेलना कूदना मना है। ऐसा राष्ट्रगान को आदर देने के लिए किया जाता है। अगर किसी को भी राष्ट्रगान बजता हुआ सुनाई दे, तो अपनी जगह पर सावधान की मुद्रा में खड़े होकर उसकी प्रति सम्मान हर हाल में प्रकट करना।

 

हर शहीद है एक स्वतंत्रता सेनानी

ज स्वतंत्र दिवस का पर्व मनाते हुए हमें उन शहीदों को भी याद करना चाहिए, जिन्होंने अपने प्राणों का बलिदान देकर यह सुनिश्चित किया है कि हम सर उठाकर जी सके। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि आज हम 15 अगस्त को स्वतंत्र दिवस की खुशियां मना रहे हैं तब हमारी सीमाओं की रक्षा कौन कर रहे हैं हम उन वीर जवानों का बलिदान कभी नहीं भूलेंगे। आज हम सबको प्रतिज्ञा लेनी हैं एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए जो अपने इन सूरवीरों के बलिदान को सार्थक करें। हमें अपने वीर शहीदों के सपनों का भारत बनाना है।

कर्नल बी संतोष बाबू ( हैदराबाद),                        सिपाही चंदन कुमार ( भोजपुर),                                  सिपाही अंकुश ( हरिमपुर),                                          सिपाही अमन कुमार ( समसतीपुर),                                 लांस नायक दीपक कुमार ( रीवा),                                  सिपाही गणेश राम ( काकेर),                                        सिपाही गणेश ( सिंहभूम),                                              नायब सूबेदार नंदूराम सोरेन ( मयूरभंज),                        नायब सूबेदार मंदिर सिंह ( पटियाला),                          हवलदार सुनील कुमार ( पटना),                                    हवलदार के पलानी ( मदुर्),                                          सिपाही गुरतेज सिंह ( मनसा),                                        सिपाही गुरविंदर सिंह ( सगरूर),                                  हवालदार विपुल राव ( मेरठ),                                          सिपाही राजेश (वीरभूम),                                                सिपाही कुंदन कुमार ( सहरसा),                                    सिपाही कुंदन कुमार ( साहिबगंज),                                सिपाही जय किशोर सिंह ( वैशाली),                              नायब सूबेदार सतनाम सिंह ( गुरदासपुर),                    सिपाही चंद्रकाता प्रधान ( कधमाल)। 

 

कहां बना था तिरंगा का नमूना

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की अभिकल्पना की पिंगली बैकया ने की थी। और इसे इसके वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई 1947 ईसवी को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। सविधान सभा के इस तिरंगे में अशोक चक्र के रखने का प्रस्ताव पर मौहर लगा दी। तो, संविधान सभा में मेंबर सेक्रेट्री तथा आईपीएस अफसर की अहमत से कहा गया। कि, वह एक नमूना झंडा बनवाकर संविधान सभा के सदस्यों को दिखाएंगे उन्होंने यह नमूना कनाड प्लेस में मसहूर एस-एस-सी शर्मा टेलर से बनवाया था। उसे देखने के बाद संविधान सभा में ने उस पर अपनी अंतिम मौहर लगाई। जिसके बाद, 15 अगस्त 1947 ईसवी को भारतीय ध्वज के रूप में तिरंगा लहराया गया था।

 

युवाओं की मुट्ठी में है तकदीर हमारी

राष्ट्रपति महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन में स्वराज और ग्राम उद्योग की परिकल्पना के केंद्र में युवाओं को रखा था। युवाओं को खादी निर्माण के जरिए ना सिर्फ स्वरोजगार का मॉडल दिया, बल्कि ‘स्वदेशी अपनाओ, विदेशी भगाओ‘ के नारे के जरिए अंग्रेजो के खिलाफ उनका जोश भी बुलंद किया। आजादी में साढ़े सात दशक बाद आज फिर से युवा आत्मनिर्भर भारत अभियान के केंद्र में है। दिलचस्प संयोग यह है कि इस साल भारत दुनिया का सबसे युवा देश बना है, जहां आधी आबादी की उम्र 25 से भी कम है। आधुनिक तकनीक और डिजिटल के दौर में हमारे युवा पहले से ही नए कीर्तिमान गढ़ रहे हैं। गांधी की तर्ज पर स्वरोजगार का नया मॉडल खड़ा करते युवाओं के बूते आज दुनिया में सबसे बड़ा स्टार्टअप इको-सिस्टम भारत का है। वे लाखों रोजगार पैदा कर रहे हैं। पिछले साल तक 5.5 करोड़ से ज्यादा युवा स्वरोजगार खड़ा कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, देश में अवसरों की समानता, गरीबी मिटाने, शिक्षा के स्तर व प्रशासनिक तरीके सुधारने में युवा बड़ी भूमिका निभाकर वास्तविक अर्थों में आजादी के को साकार कर सकते हैं।

 

15 अगस्त के बारे में कुछ रोचक बातें

प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त के दिन के दिन देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते हैं। लेकिन, देश के पहले स्वतंत्रता दिवस पर भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु जी ने लाल किले पर 16 अगस्त  1947 ईसवी को फहराया था।

15 अगस्त 1947 ईसवी को भारत के लगभग 32, करोड लोगों ने आजादी का सूरज देखा था। लेकिन, जशन के साथ-साथ एक दुख की बात यह भी थी। कि, भारत का विभाजन हो गया था। और भारत के दो हिस्से हो गए थे। एक हिस्सा भारत और दूसरा हिस्सा पाकिस्तान।

• भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने 15 अगस्त के दिन को भारत की आजादी का दिन कहा था।

• भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के स्वतंत्रता कार्यक्रम में शामिल होना था। इसलिए, उन्होंने पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को और भारत का स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को घोषित किया।

• भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु जी ने अपना प्रसिद्ध भाषण Tryst with Destiny 14 अगस्त को मध्य रात्रि में दिया था। जबकि, वह देश के प्रधानमंत्री 15 अगस्त सुबह बने थे।

• भारत देश का तिरंगा सबसे पहले 22 अगस्त 1907 को भीका कामा ने जर्मन में फहराया था। लेकिन, इस तिरंगे में और भारत के तिरंगे में थोड़ा अंतर था।

• देश की आजादी स्थिर रहे। इसके लिए, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी ने उज्जैन के ज्योतिषी सूर्यनारायण व्यास के पंचांग देखकर आजादी का मुहूर्त निकलवाया था।

 

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